तलाक़ पर हस्ताक्षर किए, अब वह घुटने टेककर भीख माँग रहा है

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अध्याय 151

जब मुझे होश आया, मैं एक अस्पताल के कमरे में था, जहाँ हर तरफ़ कीटाणुनाशक दवा की तीखी गंध फैली हुई थी।

मेडिकल मशीनों की लगातार “बीप-बीप” मेरे कानों में गूँज रही थी।

मैंने धीरे-धीरे आँखें खोलीं। नज़र धुँधली थी, और दिमाग़ पूरी तरह खाली।

“जेम्स, तुम आखिरकार होश में आ गए!” मेरे बिस्तर के पास एक लड़की ब...

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